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स्टॉपलॉस-लिमिट आर्डर को स्टॉपलॉस-मार्केट आर्डर के जैसे कैसे इस्तेमाल कर सकते है ?

एक ट्रेड जो कि मार्केट प्राइस से बहुत अलग प्राइस में एक्सीक्यूट होता है उसे फ्रिक ट्रेड( ‘freak trade’) कहते है।फ्रिक ट्रेड किसी भी शेयर में कम लिक्विडिटी के कारण होता है या फिर मार्केट डेप्थ में कम बायर्स और सेलर्स होने के कारण होता है।यदि आपका ट्रेड बहुत बड़े मार्केट आर्डर के साथ मिलता है, तो भी फ्रिक (freak) ट्रेड हो सकता है।

जब भी आप मार्केट आर्डर डालते है तो उसमे फ्रिक ट्रेड होने की संभावना हो सकती है जिससे आपको नुकसान हो सकता है।

जबकि लिमिट आर्डर में दिए गए प्राइस पर ही आर्डर एक्सीक्यूट होता है लेकिन इस बात की गारंटी नहीं होती की शेयर उस प्राइस पर जायेगा या नहीं।

लेकिन एक तरीका है जिससे दोनों टाइप के ऑर्डर के फायदे ले सकते है , यानी एक लिमिट ऑर्डर की जिससे आर्डर आपके दिए हुए प्राइस पर एक्सीक्यूट हो (इसलिए कोई फ्रिक ट्रेड नहीं) और दूसरा की इस बात की गारंटी भी होना कि मार्केट ऑर्डर फिल हो जाये।

जिसके लिए आप स्टॉपलॉस लिमिट आर्डर को स्टॉपलॉस मार्केट आर्डर की तरह इस्तेमाल कर सकते है।

स्टॉपलॉस आर्डर एक टाइप का आर्डर है, जहां आप ट्रिगर प्राइस डालते है। जिस पर लिमिट आर्डर या मार्केट आर्डर डाला जाता है। यह ट्रिगर एक्सचेंज के साथ डाले जाते है ब्रोकर के साथ नहीं।

जैसे आप लिमिट आर्डर को मार्केट आर्डर की तरह उपयोग करते है , उसी तरह आप SL -L (स्टॉप लॉस लिमिट) आर्डर को SL-M की तरह उपयोग कर सकते है। यह करने के लिए , आपको इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि आप लिमिट प्राइस ट्रिगर प्राइस से ज्यादा डालें जब कि आप खरीदने का आर्डर डालते है और लिमिट प्राइस को ट्रिगर प्राइस से नीचे डाले जबकि सेल आर्डर डालते है।

यहाँ एक उदाहरण है -

स्टॉक = ITC

पोजीशन = Short

शार्ट प्राइस = 245

CMP = 241

SL ट्रिगर = 248

SL लिमिट = 258

यहाँ SL लिमिट बॉय प्राइस

जैसे ही SL ट्रिगर प्राइस 248 पर ट्रेड होगा SL लिमिट बॉय प्राइस जो 258 पर है, ट्रिगर हो जायेगा। लेकिन 258 करंट मार्केट प्राइस 248 से बहुत ज्यादा है इसलिए यह आर्डर लिमिट आर्डर की तरह काम करेगा और 248 से 258 के बीच में एक्सीक्यूट होगा।

इस जगह, यदि दूसरा बड़ा मार्केट आर्डर आपके आर्डर के साथ मिल जाता है तो 258 फ्रिक ट्रेड के प्रोटेक्शन के जैसे काम करेगा।

उसी तरह से , जब आप SL सेल लिमिट आर्डर करंट मार्केट प्राइस के नीचे डालते है तो आपको SL लिमिट आर्डर एक SL मार्केट आर्डर के जैसे काम करेगा।

उदाहरण के लिए , मान लीजिये की आप Nifty 17500 CE को खरीदते है जिसका करंट प्राइस 185 है आप एक SL लिमिट सेल आर्डर 170 पर डालते है जिसमे आपका ट्रिगर प्राइस 180 है।क्योंकी करंट मार्केट प्राइस 185 है और आप SL लिमिट सेल आर्डर नीचे के प्राइस पर डालते है आपका आर्डर मार्केट आर्डर की तरह काम करेगा और तुरंत एक्सीक्यूट हो जायेगा।यहां आपका आर्डर 170 पर सेल् हो जायेगा।

इस स्तिथि में , यदि आपके आर्डर के साथ कोई बाद मार्केट आर्डर मिलता है तो प्राइस बढ़ जायेगा और आपका लिमिट आर्डर इस बात से प्रोटेक्ट करेगा कि आपका आर्डर 170 से नीचे के प्राइस पर एक्सीक्यूट न हो।

नोट : लिमिट प्राइस और ट्रिगर प्राइस के बीच जितना ज्यादा अंतर होगा , आपके लिमिट आर्डर के पेंडिंग रहने की उतनी कम चांसेस होगी , लेकिन इम्पैक्ट कॉस्ट ज्यादा होगा ।

NSE ने 27 सितम्बर 2021 से ऑप्शंस के लिए SL-M आर्डर टाइप को बंद कर दिया है।

लिमिट आर्डर के मार्केट आर्डर के जैसे कैसे इस्तेमाल करना है , इसके लिए यहाँ क्लिक कीजिये।