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What is a daily margin statement and how to interpret it?

(हिंदी में पढ़ें)

As per the exchange regulations, we send a daily margin statement to every client's registered email address. This statement informs the client his/her margin status, i.e. what free margins are available in her/his account in order to take new positions without incurring penalty or charges. There is a definite format for the daily margin statement prescribed by SEBI. 

If you trade across all exchanges, you will receive a combined daily margin statement. A margin statement for a particular exchange will have all the segments included, that is if you trade on NSE EQ (equity), NSE F&O (equity derivatives), NSE CDS (currency derivatives), all the segments will be included in the daily margin statement.

The daily margin statement should be issued on the Trade day (T-Day). The margin statements are available to download from your Console login once the trade process is done for the day. This is usually around 8.30 PM. 

Understanding the Daily margin statement:

Every broker must compulsorily disclose the following details in the margin statement - 



Note - 

1. NSE through this circular prescribed a new margin statement format. We issue the daily margin statements in the new prescribed format. However, the statements downloaded from Console will show the margin statements in the old format, for dates before 9th July 2018.

2. The exchange further released this circular directing the below modifications to the margin statement column headers:  
i) MTM and the column heading i.e. ‘Margin/MTM required by Exchange/CC end of T & T+1 day respectively’ shall be replaced with ‘Consolidated Crystallized Obligation’ and ‘Margin/ Consolidated Crystallized Obligation required by Exchange/CC end of T & T+1 day respectively’.
ii) With respect to futures & options & currency derivatives segments, the term "Mark to Market (MTM)" specified in NSE circular NSE/INSP/43069 dated December 31, 2019 shall be read as "Margin on consolidated crystallized obligation".


Below is an example of a daily margin statement:  




Each of its components is explained below: 

Funds — Shows the closing balance of the respective segment's ledger after reversing the effect of T-day credit in the F&O and CDS segments. Similarly, closing balance in NSE EQ and BSE EQ segments is shown after reversing the effect of T-day and T-1 day credit. 

NSE EQ: Closing balance without margin of the NSE EQ ledger after reversing the effect of T day and T-1 day credit
BSE EQ: Closing balance without margin of the BSE EQ ledger after reversing the effect of T day and T-1 day credit 
NSE F&O: Closing balance without margin of the NSE F&O ledger after reversing the effect of T day credit 
NSE CDS: Closing balance without margin of the NSE CDS ledger after reversing the effect of T day credit 
Mutual Funds: Closing balance of the mutual funds ledger. 

Note - Brokers should maintain separate ledgers for every segment. But as an industry norm, in the margin statement, all pay-ins will be posted to the 'NSE EQ' segment, however, debits will be posted in the respective segment ledger and shown accordingly in the margin statement.

E.g.  Assume you add 1 lac to your trading account. That day's margin statement will have Rs 1 lac posted under the Funds column in the NSE EQ row. The next day if you take a position in F&O for Rs 40000, in that day's margin statement, in the Funds column, the NSE EQ row will show 1 lac and the NSE F&O row will show -40000. The subtotal of the Funds column will show the net amount i.e. 60000 which will be the unencumbered balance available in your account at the end of the day.


Value of Securities (after haircut) — margins received from pledging holdings if any i.e. collateral margins.

Note - At Zerodha, we don't provide margins based on 'Bank guarantees/Fixed Deposit receipts' or 'any other approved form of margins'. So Total margins available will be the sum of Funds & Value of securities after a haircut.

Total upfront margins — This includes the total margins required by the exchange for the positions you have taken if any. Below are the margin values considered for each of the segment:

EQ - Sum of VAR + ELM + Minimum Margin + Additional Margin
F&O - Sum of SPAN margin + Exposure Margin + Physical delivery margin + Additional margin.
CDS - Sum of SPAN margin + Extreme Loss margin + Additional margin

Consolidated crystallized obligation — This column shows the sum of MTM losses if any in the respective segment.

Total requirement — This shows the total amount blocked by the exchange for your position, segment-wise. This is calculated as Total upfront margin + Consolidated crystallized obligation. 

Excess/Shortfall w.r.t requirement by exchange — This column shows the value of 'Total margin available' minus the value of 'Total requirement'

Additional Margin required by the member as per RMS — This column shows any additional margins blocked by the broker. At Zerodha, we charge additional margins for commodity derivatives and physical delivery contracts in their expiry week. Read more here.  

Margin Status (balance with member/ due from the client) — This column shows you the totally free/unencumbered balance that is available for taking new trades on the next trading day.


डेली मार्जिन स्टेटमेंट के बारें में:


एक्सचेंज रेगुलेशन के अनुसार हम रोज़ डेली मार्जिन स्टेटमेंट अपने हर एक क्लाइंट को उसके रजिस्टर्ड ईमेल id पर भेजते है । डेली मार्जिन स्टेटमेंट SEBI द्वारा बताये हुई तरीके में ही भेजते हैं । मार्जिन स्टेटमेंट इस इरादा से भेजते है, ताकि हमारे क्लाइंट को यह मालूम रहे की उनका मार्जिन स्टेटस क्या है i.e उनके अकाउंट में कितना फ्री मार्जिन है जिससे वह कोई नया पोज़िशन ले सके बिना किसी जुर्माना या शुल्क के ।


आप अगर हर एक्सचेंज पर टार्डिंग करते है तो आप को कंबाइंड डेली मार्जिन स्टेटमेंट मिलेगा। किसी विशेष एक्सचेंज के लिए मार्जिन स्टेटमेंट में सभी सेगमेंट शामिल होंगे, मतलब अगर आप NSE EQ (equity) और NSE F&O - NSE CDS (equity & currency derivatives), दोनों सेगमेंट डेली मार्जिन स्टेटमेंट में शामिल होगी ।


डेली मार्जिन स्टेटमेंट ट्रेड डे (टी-डे) पर जारी किया जाना चाहिए। ट्रेड प्रोसेस के पूरे होने के बाद मार्जिन स्टेटमेंट आपके कंसोल लॉग इन से डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध हैं। यह प्रायः 8.30 बजे के आसपास होता है।


डेली मार्जिन स्टेटमेंट को कैसे समझ सकते हैं : 


हर ब्रोकर को ज़रूरी है की वह इन चीज़ों को मार्जिन स्टेटमेंट में दिखाएं : 



नोट :


  1. इस सर्कुलर के माध्यम से NSE ने एक नया मार्जिन स्टेटमेंट फ़ॉर्मेट जारी किया है। हम नए जारी किये फ़ॉर्मेट के हिसाब से डेली मार्जिन स्टेटमेंट जारी करते हैं। हालांकि, कंसोल से डाउनलोड किए गए स्टेटमेंट 9 जुलाई 2018 से पहले की तारीखों के लिए पुराने फ़ॉर्मेट में मार्जिन स्टेटमेंट दिखाएँगे।


  1. एक्सचेंज ने इस सर्कुलर को जारी करके नीचे दिए गए मॉडिफिकेशन्स को मार्जिन स्टेटमेंट कॉलम हेडर के लिए निर्देशित किया:

i) MTM और कॉलम हैडिंग जो ‘Margin/MTM एक्सचेंज द्वारा आवश्यक है /CC, T & T+1 के अंत में’ ‘Consolidated Crystallized Obligation’ और ‘Margin/ Consolidated Crystallized Obligation एक्सचेंज द्वारा आवश्यक /CC end of T & T+1 day से बदल दिया गया है।  

ii) फ़्यूचर, ऑप्शंस और करेंसी डेरीवेटिव के सम्बन्ध मे, यह टर्म "Mark to Market (MTM)" इस NSE सर्कुलर में निर्दिष्ट NSE/INSP/43069 दिनांक December 31, 2019 "Margin on consolidated crystallized obligation" करके पढ़ा जायेगा।  


नीचे एक देय मार्जिन स्टेटमेंट का उदाहरण दिया गया है: 


इसके प्रत्येक कॉम्पोनेन्ट को नीचे समझाया गया है:


फंड - F&O और CDS सेगमेंट में T - डे क्रेडिट के एफ्फेक्ट को रिवर्स करने के बाद संबंधित सेगमेंट के लेज़र के क्लोजिंग बैलेंस को दर्शाता है। इसी तरह, NSE EQ और BSE EQ सेगमेंट में क्लोजिंग बैलेंस को T - डे और T - 1 डे क्रेडिट के एफ्फेक्ट को रिवर्स के बाद दिखाया गया है।


NSE EQ: T डे  और T-1 डे  क्रेडिट के एफ्फेक्ट को रिवर्स करने के बाद NSE EQ लेज़र के मार्जिन के बिना क्लोजिंग बैलेंस को दिखाता है।  

BSE EQ: T डे और T-1 डे  क्रेडिट के एफ्फेक्ट को रिवर्स करने के बाद BSE EQ लेज़र के मार्जिन के बिना क्लोजिंग बैलेंस को दिखाता है।

NSE F&O: T डे के डेबिट और क्रेडिट के एफ्फेक्ट को रिवर्स करने के बाद NSE EQ लेज़र के मार्जिन के बिना क्लोजिंग बैलेंस को दिखाता है।  

NSE CDS: T डे के डेबिट और क्रेडिट के एफ्फेक्ट को रिवर्स करने के बाद NSE CDS लेज़र के मार्जिन के बिना क्लोजिंग बैलेंस को दिखाता है।

म्यूच्यूअल फंड्स: म्यूच्यूअल फंड्स लेड़गेर के क्लोजिंग बैलेंस को दिखाता है।  


नोट - ब्रोकर्स को अलग अलग लेड़गेर्स रखना हर सेगमेंट के लिए ज़रूरी है। लेकिन इंडस्ट्री मानक के रूप में, मार्जिन स्टेटमेंट में, सभी पे-इन को 'NSE EQ' सेगमेंट में पोस्ट किया जाएगा, हालांकि, डेबिट को संबंधित सेगमेंट लेज़र में पोस्ट किया जाएगा और मार्जिन स्टेटमेंट के अनुसार दिखाया जाएगा। 


उदाहरण के तौर पर समझ लीजिये आपने ट्रेडिंग अकाउंट में 1 लाख डिपाजिट किया।  उस दिन के मार्जिन स्टेटमेंट में, फंड कॉलम के NSE  EQ वाले रौ में 1 लाख पोस्ट किया जायेगा। अगले दिन अगर आपने कोई 40000 का F&O पोजीशन लिया तब उस दिन के मार्जिन स्टेटमेंट में फंड कॉलम में NSE EQ रौ 1 लाख दिखायेगा और NSE F&O रौ में -40000 दिखायेगा।  फंड कॉलम का सब टोटल नेट अमाऊंट दिखायेगा जो 60000 है और यह बैलेंस आपके अकाउंट में unencumbered बैलेंस के तरह दिखेगा।  


सिक्योरिटीज की वेल्यू (हेअरकट के बाद ) - प्लेज की गयी होल्डिंग से प्राप्त हुआ मार्जिन यानि कोलैटरल मार्जिन दिखेगा।  


नोट - ज़ेरोधा में हम बैंक गारंटी/फिक्स्ड डिपाजिट रेसित या कोई एप्रूव्ड तरह का मार्जिन नहीं उपलब्ध करते। तो कुल मार्जिन उपलब्ध सारे फंड का जोड़ और सिक्योरिटीज की वेल्यू हेअरकट के बाद मिलकर होगा।  


कुल अपफ्रंट मार्जिन - इसमें आपके द्वारा लिए गए पोसिशन्स के लिए एक्सचेंज द्वारा आवश्यक कुल मार्जिन शामिल हैं यदि कोई हो। प्रत्येक सेगमेंट के लिए मार्जिन मान नीचे दिए गए हैं:


EQ - Sum of VAR + ELM + Minimum Margin + Additional Margin

F&O - Sum of SPAN margin + Exposure Margin + Physical delivery margin + Additional margin.

CDS - Sum of SPAN margin + Extreme Loss margin + Additional margin


कंसोलिडेटेड क्रिस्टलिज़ेड ऑब्लिगेशन - यह कॉलम संबंधित सेगमेंट में MTM लोस्स का योग दिखाता है।


कुल रेक्विरेमेंट - आपके पोजीशन, सेगमेंट-वाइज एक्सचेंज द्वारा ब्लॉक्ड कुल अमाउंट को दर्शाता है। इसको ऐसे कैलकुलेट करते हैं: टोटल अपफ्रंट मार्जिन + कंसोलिडेटेड क्रिस्टलिज़ेड ऑब्लिगेशन।  


एक्सिस/शॉर्टफॉल रेक्विरेमेंट एक्सचेंज द्वारा सहित - यह कॉलम "टोटल मार्जिन उपलब्ध" - "वेल्यू ऑफ़ टोटल रेक्विरेमेंट" को दिखाता है।  


मेंबर द्वारा आवश्यक एडिशनल मार्जिन RMS के हिसाब से - यह कॉलम ब्रोकर द्वारा ब्लॉक किये गए एडिशनल मार्जिन को दिखाता है।  ज़ेरोधा में हम एडिशनल मार्जिन कमोडिटी डेरीवेटिव और फ़िज़िक्स डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी वीक में चार्ज करते हैं।  अधिक जानकारी यहाँ मौजूद है।  


मार्जिन स्टेटस (मेंबर के पास बैलेंस/ क्लाइंट द्वारा ड्यू ) - यह कॉलम आपको पूरा उपलब्ध/ उनंकंबरेड़ बैलेंस जो आपको नए ट्रेड लेने के लिए अगले दिन उपलब्ध है उसको दिखाता है।