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How do I participate in an Open Market Buyback? How is it different from a normal buyback?

(हिंदी में पढ़ें)

Companies can choose two different methods to buy back shares from their public shareholders:


1. Buyback Tender Offer: The company makes an offer to buy back its shareholders(Offer price) at which the shareholders can tender their shares. If you are eligible for the buyback, you can apply for the same from Console. You can read more on the process to apply here.

2. Open-market buyback: The company can opt to buy back its shares by actively buying from sellers on the exchange platform. The company mentions the period of buyback in the buyback offer. These buybacks usually last for months as the company has to ensure that there isn't significant price appreciation due to its buying activity.

You might not receive the settlement for all the shares that you sold for a buyback offer because only a portion of it would have matched with the company's buyback order. You will receive an email from the exchange where your trades are executed with the details of your executed buyback order, including the quantity of the shares.

The government has introduced a buyback tax, and the company buying back the shares (open-market or tender buyback offer) pays all taxes on the buyback offer. You can use this confirmation for appropriate tax exemptions under the provisions of the Income Tax Act, 1961.

Assume, you have sold 2000 shares of a company from your holdings. It is possible that the company buys back only 800 shares and the remaining 1200 shares might have been sold to another regular buyer. You will receive an email from the exchange confirming the transaction of the 800 shares that were bought back by the company.

You can find these details here on the SEBI website along with the list of all upcoming open market buybacks.

Check out this chapter on Varsity to know why companies choose to buy back their shares and its impact.

मैं ओपन मार्किट बायबैक में कैसे हिस्सा ले सकता हूँ ?


कंपनियां अपने पब्लिक शेयरहोल्डर्स  से शेयर वापस खरीदने के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल कर सकती हैं:

1. बायबैक टेंडर ऑफर : इसमें कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स के शेयर्स, ऑफ़र प्राइस पे वापस खरीदने की पेशकश करती है। इस  ऑफर प्राइस  पर शेयरहोल्डर्स  अपने शेयर्स को टेंडर कर सकते हैं। यदि आप बायबैक के लिए एलिजिबल हैं, तो आप Console के ज़रिये इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं । आप आवेदन करने की प्रोसेस के बारे में अधिक यहां से जान सकते हैं।

2. ओपन-मार्केट बायबैक : इसमें कंपनी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर  सेलर्स से शेयर्स वापस खरीदने का ऑप्शन चुन सकती है। कंपनी बायबैक ऑफर में बायबैक की अवधि का जिक्र करती है। ये बायबैक आमतौर पर महीनों तक चलते हैं क्योंकि कंपनी को यह सुनिश्चित करना होता है कि उसकी खरीदारी के वजह से शेयर प्राइस पर कोई बड़ा असर न पड़े ।

हो सकता है कि आपके द्वारा बायबैक ऑफर के लिए बेचे गए सभी शेयर्स न बिक पाएं क्योंकि आपके ऑफर का  केवल कुछ हिस्सा कंपनी के बायबैक ऑर्डर से मेल खाता होगा। आपको एक्सचेंज से एक ईमेल प्राप्त होगा जहां आपके बायबैक में बेचे गए सारे शेयर्स की मात्रा और प्राइस की सूचि होगी।

सरकार ने बायबैक टैक्स लागु किया है, और शेयर वापस खरीदने वाली कंपनी  (ओपन-मार्केट या टेंडर बायबैक ऑफर में ) बायबैक ऑफर पर लागु सभी टैक्स का भुगतान करती है। आप इस कन्फर्मेशन का उपयोग Income Tax Act , 1961 के तहत उचित टैक्स छूट के लिए कर सकते हैं।

मान लें, आपने अपनी होल्डिंग से बायबैक के लिए किसी कंपनी के 2000 शेयर बेचे हैं। यह संभव है कि कंपनी केवल 800 शेयर वापस खरीद ले और शेष 1200 शेयर किसी अन्य मार्किट खरीदार को बेचे गए हों । आपको एक्सचेंज से एक ईमेल प्राप्त होगा जिसमें कंपनी द्वारा वापस खरीदे गए 800 शेयरों के लेनदेन की कन्फर्मेशन होगी।

आप इन डिटेल्स को SEBI की वेबसाइट पे  यहाँ देख सकते हैं I